ससुर ने मिटाई मेरी कामवासना

Antarvasna – नमस्ते दोस्तो, मैं विमला आज आप सभी सेक्स स्टोरी पढ़ने वालों के साथ मैं अपनी भी कहानी बताने वाली हूँ। क्योंकि मैं भी रोज हिन्दी सेक्स कहानियां पढ़ती हूँ। मेरे साथ हुए अनजाने में एक सेक्स की दासता आप सबके साथ मे बताने जा रही हूँ। आप सब पढ़ के जरूर बताना की आपको मेरी पहली स्टोरी कैसी लगी।

तो ये कहानी सुरु होती है,आज से 2 साल पहले ही। मेरी नई नई सदी हुई थी। मैं गौ से शहर अपने पति के साथ रहने गई थी। वहाँ हमारे साथ मेरे सास ससुर भी रहते थे। मैं बहोत ख़ुशी के साथ अपने परिवार के साथ रह रही थी। मेरे पति मुझसे बहोत प्यार करते हैं। मैं उनके साथ सभी तरह से खुश थी। यहाँ तक कि मेरे पति तो एकदिन मुझे बिना सेक्स किये न रहने देते थे। उनका जब मन करता था वो मेरे सेक्स कर लेते थे। रात तो रात कभी कभी दिन को भी कर लेते थे। मैं उनके साथ बहोत कुश थी। मेरे पति एक अच्छे कम्पनी में काम करते थे।

एक दिन मेरे पति अपने आफिस से उदास होके आये। मैं उन्हें ऐसे देख के पूछी तो उन्होंने बताया कि उन्हें एक महीने के लिए विदेश जाना है। ये बात उनके लिए अच्छी थी कि उनकी तरक़्क़ी होगी इससे लेकिन उन्हें 1 महीने के लिए हमसे दूर होना पड़ेगा। न उनको मुझसे दूर जाने का मन था न मेरा उनसे दूर होने के लेकिन काम के लिए उन्हें जान पर गया। जाने के पहले उस मैं उनके साथ भरपूर सेक्स की लेकिन 1 महीने के कोटा तो पूरा नही ही हो सकता था। क्योंकि यहाँ यो रोज सेक्स करने का आदत हो गया था मुझे भी।

अगली सुबह मेरे पति चले गए। अब मैं अपने सास ससुर की सेवा में लगी रहती थी। मगर रोज रात को हम फ़ोन सेक्स करते थे। या वीडियो कॉल पे मेरी चूत और चुचियो को देखते थे। मुझे भी मज़ा आता था लेकिन वो कमी कहा से पूरी होने वाली थी। ऐसे करते करते 15 दिन बीत गए थे।रोज हम वीडियो कॉल करते और मैं अपनी चूत में उंगली करती थी।

एक दिन मेरी सास किसी रिश्तेदार के यहाँ गयी थी। उस दिन मैं और मेरे ससुर घर मे थे। शाम के वक़्त मेरे ससुर ने मुझे कहा कि बहु मेरा जरा पैर दबा दो। मैं उनका पैर दबाने लगी और वो बोले थोड़ा और ऊपर तक दबाव और अपने लुंगी को घुटनों तक उठा लिया। मेरे ससुर ने अंदर कुछ नही पहना था। और उनका लण्ड जोकि बहोत मोटा था साफ दिख रहा था मुझे। इतने दिनों के बाद ऐसे मोठे तगड़े लण्ड को देख मेरे मन उसे पाने को करने लगा। मैं पैर दबाते हुए अपने हाथ ऊपर लिए जा रही थी। तभी एहसास हुआ मुझे की ये मेरे ससुर है और ये मैं क्या करने जा रही हूँ। मैं तुरुन्त अपने कमरे में भाग आयी।

फिर रात को मैं ससुर जी को खाना खिला के और खुद खा के अपने रूम में आ गयी। रोजाना की तरह मैं अपने पति के साथ फ़ोन सेक्स करने लगी। और अपनी चूत में उंगली करने लगी थी। मैं चूत में उंगली करते हुए मदहोश हो गयी थी और मुझे पता भी नही चला कि फ़ोन कब कट गया। मैं तो अपने पति के बारे मे सोच के चूत में उंगली किये जा रही थी। मैं अपने पुराने दिन याद कर रही थी। तभी मेरे पैर पे सहलने सा महसूस हुआ। मुझे ऐसा लगा कि मेरे पति मेरे साथ है। तभी मेरी नज़र पारी तो वो मेरे ससुर जी थे। गलती से मैं अपना रूम का गेट बंद करना भूल गयी थी और वो कब आ गए मुझे पता नही चला।

मैं उनसे बोली कि ससुरजी ये आप क्या कर रहे है। वो मुझसे बोले जो तुम खुद कर रही थी वो मैं पूरा कर देता हूं। जो तुम्हे चाहिए वो मैं तुम्हे दे सकता हूँ। मुझे पता है कि मेरा बेटा इतने दिनों से नही है और तुम्हे क्या कमी महसूस हो रही होगी। मैं बोली नही ये सही नही है। वो बोले अभी सही गलत नही देखो। अभी तुम भी प्यासी हो और मैं भी बहोत साल से भूखा हु। भले ही मेरी उम्र हो गयी है लेकिन मेरे अंदर जान वैसी ही है। मैं कुछ बोलती उससे पहले वो मेरे पल्लू को कीच दिए। मेरे अंदर तो पहले से आग लगी हुई और ऊपर से उनका लण्ड मैं भूली नही थी। मैं भी उनको रोक नही पाई। मेरा दिमाग तो कह रहा था ये गलत है लेकिन मेरा दिल नही मान रहा था। साथ में मेरी चूत लण्ड लेने को बेक़रार था।

मैं उनसे हट के दीवाल के कोने में चली गयी। वो मेरे सारी को पकड़ के किचने लगे और मैं भी सारी को खोलने दिया। उन्होंने मुझे कीच के चूमने लगे और मेरी बदन को चूमने लगे। मेरे अंदर की ज्वाला और भड़क गई थी। अब तो हम दोनों चाह के भी नही रुक सकते थे। उन्होंने मुझे बेड पे धकेल दिया। और मेरे पेटीकोट को कीच के फेक दिया। मैंने अपनी पेंटी तो पहले ही उतार दी थी। अब वो मेरे पैरों से चूमते हुए ऊपर आते गए। उन्होंने मेरी ब्लाउज उतार दिया और मेरी ब्रा भी खोल दिया। वो मेरे चुचियो को दबाने औऱ चसुने लगे। मैं तो कामवासना में डूबे जा रही थी।

अब वो उठे और अपने कपड़े उतार दिये। उनका लण्ड एकदम से ताना हुआ था। उनका लण्ड मेरे पति जितना लम्बा तो नही लेकिन मोटा बहोत था। वो अब मेरी चूत को चाटने लगे, वो बस चूसे जा रहे थे और मैं पागल हुई जा रही थी। कुछ देर चुसने के बाद वो खरे हुए और मेरी चूत पे उंगली फेरी बोले अब डाल दु क्या। मैंने भी हामी भरी और उसके बाद उन्होंने ने मेरे चूत में अपना लण्ड डाल दिया।

इतने दिनों के बाद लण्ड लेके बहोत सुकून मिला था। वो अब पूरे जोश के साथ अंदर बाहर कर रहे थे। मेरी चुचियो को पकड़ के धका दे रहे थे। उनके अंदर जानवर आज दिख रहा था। जो जोश उनके बेटे में था वही बाप में भी था। लेकिन उम्र होने के करण उनके अंदर वो ताकत नही थी। वो मैंने उन्हें नीचे लिटा दिया और अपने चूत के अंदर उनका लण्ड अंदर ले लिया और लण्ड पे खुद उछाल मारने लगी। काफी समय करने के बाद मैं झर गयी और ससुर जी का भी हो गया था। मैं थक के चूर हो गयी।

मुझे ये कर के बुरा भी लग रहा था कि मैं अपने ससुर के साथ ये कर रही हूँ। लेकिन मेरे अंदर की हवस मुझे ये करवा रही थी। उसके बाद मेरे ससुर ने एक बार और मेरी चूत मारी फिर हम दोनों वैसे ही नंगे सो गए। उस दिन के बाद से मैं अपने ससुर से नज़र मिला के बात नही करती हूं।लेकिन मेरे ससुर मेरी दुबारा चूत मारने की फिराक में है।

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